अच्छे दिनों का कौन करे इंतजार और

आखिर कहां से लाइए सब्रो-करार और. अच्छे दिनों का कौन करे इंतजार और.   शायद अभी यक़ीन का दर हो खुला हुआ चक्कर लगा के देखते हैं एक बार और.   कुछ रहगुजर पे धूल भी पहले से कम न थी कुछ हमने भी उड़ा दिया गर्दो-गुबार और.   बिजली किधर से दौड़ रही थी,… Continue reading अच्छे दिनों का कौन करे इंतजार और